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मानस राष्ट्रीय उद्यानःप्रकृति का स्वर्ग

मानस राष्ट्रीय उद्यान भारत का एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान हैं। यह उद्यान असम में स्थित हैं। यह उद्यान एक सींग के गैंडे और बारहसिंघा के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह भूटान की तराई में बोडो क्षेत्रीय परिषद की देखरेख में ९५० वर्ग किलोमीटर से भी बड़े इलाके में फैला है जिसके अंतर्गत १९७३ में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत स्थापित ८४०.०४ वर्ग किलोमीटर का इलाका मानस व्याघ्र संरक्षित क्षेत्र भी आता है।
इसे १९८५ में विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया था लेकिन अस्सी के दशक के अंत और नब्बे के दशक के शुरू में बोडो विद्रोही गतिविधियों के कारण इस उद्यान को १९९२ में विश्व धरोहर स्थल सूची से हटा लिया गया था। जून २०११ से यह पुनः यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल कर लिया गया है।
मानस राष्ट्रीय उद्यान की खासियत यह है कि इसके अंदर के हिस्सों में जिप्सी से घूमकर वन्य प्राणियों को करीब से देखा जा सकता है।मानस नदी के किनारे स्थित मथानगुड़ी में प्राकृतिक छटा खूबसूरत होने के साथ ही रात को हवाएं तेज होती जाती है,जैसे कोई आंधी चल रही है।यहां से भूटान में स्थित रायल मानस उद्यान का दौरा किया जा सकता है।पहाड़ और नदी के किनारे के सर्पील रास्ते से गुजरते हुए हरी-भरी प्राकृतिक छटा और जीव-जंतु मन को मोह लेते हैं।पहाड़ों के बीच से स्वच्छ जल की मदी प्रवाहित होती है।यह दृश्य भी मन को छू लेते हैं।उद्यान के जंगली जानवर जंगलों में विचरण करते हुए नजर आते हैं।हमारे दौरे में तो हाथी,मोर,बंदर कैमरे में फोटो के लिए पोज देते हुए नजर आए।भूटान के पानबांग पहुंचकर वहां की खूबसूरती का भी आनंद लिया जा सकता है।साथ ही मनोरम झरने और स्वच्छ जल की नदी के किनारे के पत्थरों पर खडे होकर प्रकृति का आनंद उठाया जा सकता है।पूरी यात्रा जिदंगी के यादगारों क्षण में शामिल हो जाती है।इसके बाद आप यहां कोलाहल से दूर शांत के प्राकृतिक परिवेश में बार-बार आना चाहेंगे।
संक्षिप्त विवरणः

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संलग्न जिलेःबरपेटा,नलबाड़ी,बंगाईगांव,कोकराझाड़ और दरंग।
जलवायुःसालाना औसत बारिश 333 से.मी।
तापमानः29 डिग्री सेल्सियस।
मानसूनःजून से सितंबर।
ग्रीष्मकालःमार्च से मई महीने तक।
शीतकालःदिसंबर से फरवरी तक।
पेड़-पौधेः543 प्रजातियां।
वन्यप्राणीःस्तनपायी 60,पक्षी 312,सरीसृप 42,उभयचर 7,मछली 54 और 100 से अधिक कीट-पतंग पाए जाते हैं।गैंडा,हाथी,बाघ,पिग्मी हाग,दृढ़लोमी खरगोश,सुनहला लंगूर,चीता,भालू,जंगली भैंस,मोर आदि अनेक जानवर दिखते हैं।
कैसे पहुंचेःगुवाहाटी के अंतरर्राष्ट्रीय लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै हवाईअड्डे से मानस राष्ट्रीय उद्यान की दूरी 145 किमी है जबकि करीब का रेलवे स्टेशन बरपेटा रोड है।यहां से उद्यान की दूरी 20 किमी है।जिप्सी,स्क्रोपियो और बोलेरो जैसी गाड़ियां पार्क के अंदर के लिए उपयुक्त है।
कहां रुकेःरहने के लिए सबसे उत्कृष्ट स्थान मथानगुड़ी का बंगला है।यह बुक करने के लिए उद्यान के निदेशक कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।यहां रहकर प्राकृतिक छटा का आनंद लिया जा सकता है।वहीं उद्यान के बाहर भी कई निजी रिसोर्ट हैं।यहां भी रहा जा सकता है।पर मथानगुड़ी में रहने का आनंद ही कुछ है।शाम को जेनेरेटर चलाकर बिजली मुहैया कराई जाती है,पर रात दस बजे बाद जेनरेटर बंद होने के पहले कमरों में लालटेन दे दी जाती है।
यात्रा के लिए उत्कृष्ट समयःनवंबर से अप्रेल तक।उद्यान में प्रवेश के लिए बांसबाड़ी रेंज आफिस में प्रति व्यक्ति सौ रुपए देकर टिकट लेनी पड़ती है।साथ ही वाहन के लिए अलग से फीस है।बांसबाड़ी से जीप सफारी की भी व्यवस्था है।उद्यान में सूर्योदय से सूर्यास्त तक घूमने की अनुमति है।पैदल घूमना मना है।मथानगुड़ी और बांसबाड़ी में हाथी सफारी की भी व्यवस्था है।

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